शहीद पति का सपना पूरा करने जंग के मैदान पर उतरी पत्नी, बनी लेफ्टिनेंट

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शहीद पति का सपना पूरा करने जंग के मैदान पर उतरी पत्नी, बनी लेफ्टिनेंट
शहीद पति का सपना पूरा करने जंग के मैदान पर उतरी पत्नी, बनी लेफ्टिनेंट

जम्मू- कश्मीर: अक्सर होता है कि परिवार में अगर किसी का कोई सपना होता है और अगर वो सपना जिसका होता है वो पूरा नहीं कर पाता तो उसे पूरा करने का जूनून किसी अन्य सदस्य के अंदर आ जाता है। उसी तरह जम्मू-कश्मीर के उड़ी आतंकी हमले में शहीद कर्नल संतोष महाडिक की पत्नी स्वाति शनिवार को लेफ्टिनेंट बन गईं। चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में रहते हुए उन्होंने एक साल की कठिन ट्रेनिंग को पासिंग आउट परेड के साथ पूरा किया। स्वाति ने कहा कि आर्मी यूनिफॉर्म और यूनिट कर्नल महाडिक का पहला प्यार और सपना थी। इसीलिए मैंने भी इसे पहनने का फैसला कर लिया। अब पति की तरह आतंकियों से लड़ना चाहती हूं। बता दें कि कर्नल महाडिक की शहादत के बाद स्वाति ने आर्मी ज्वॉइन करने की मंशा जताई थी।

शहीद पति का सपना पूरा करने आतंकियों से लड़ूंगी: लेफ्टिनेंट बनीं स्वाति महाडिक

कौन थे कर्नल संतोष महाडिक?
– कर्नल महाडिक (39 साल) महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले थे। वे 41 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर थे। कर्नल संतोष 21 पैरा स्पेशल कमांडो यूनिट में रहे और कई ऑपरेशन्स को अंजाम तक पहुंचाया।
– जम्मू-कश्मीर में कुपवाड़ा के हाजी नाका इलाके में 2015 में आतंकियों से लड़ते हुए वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे और बाद में इलाज के दौरान शहीद हो गए थे। नॉर्थ-ईस्ट में ऑपरेशन राइनो के दौरान बहादुरी के लिए उन्हें 2003 में सेना मेडल मिला था।

शहीद पति का सपना पूरा करने आतंकियों से लड़ूंगी: लेफ्टिनेंट बनीं स्वाति महाडिक

उम्र बन रही थी बाधा:
– पति के अंतिम संस्कार के वक्त स्वाति ने कहा था कि, वे भी फौज में शामिल होकर अपने पति की जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहती हैं। इसके लिए स्वाति ने सेना से नौकरी नहीं मांगी, बल्कि पढ़ाई करके एसएसबी एग्जाम पास किया। उन्होंने सभी पांच राउंड क्लियर किए। लेकिन उम्र उनके इरादे में बड़ी रुकावट बन रही थी।
– स्वाति (32 साल) ने 11 महीने पहले सर्विस सिलेक्शन कमीशन की फाइनल लिस्ट में जगह बनाई। इसके बाद ट्रेनिंग के लिए चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चली गईं।
– सेना के नियमों के मुताबिक, 32 साल की उम्र में वो भर्ती नहीं हो सकती थी। स्वाति की इच्छा पर पूर्व आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह ने उन्हें उम्र में छूट देने की सिफारिश की थी।जिसे तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मान लिया।
आतंकियों से लेना चाहती हैं बदला
– पति की तरह ही स्वाति आतंकवाद को जड़ से खत्म करना चाहती हैं। वे अपने पति की शहादत का बदला लेना चाहती हैं।
– ”मेरे लिए आर्मी ज्वाइन करना एक इमोशनल फैसला है। जब मैं अपने पति के पार्थिव देह को कुपवाड़ा से सतारा लेकर आ रही थी, तब मेरे अंदर सिर्फ एक विचार चल रहा था। अब जब मैं उनकी ड्रेस पहनती हूं तो उसमें वे मुझे नजर आते हैं।”
– स्वाति ने कहा, “पति की शहादत के बाद से मैं सदमे में थी। जब इससे बाहर निकली तो मैंने खुद को पहले से ज्यादा मजबूत महसूस किया। ऐसा लगा कि पति जिस काम पर थे, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी मुझे भी लेनी चाहिए। बच्चे अभी छोटे हैं, वो भी सेना में आएं तो मुझे अच्छा लगेगा।”

बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में भेजना पड़ा
– शहीद कर्नल महाडिक और स्वाति की एक 12 साल की बेटी और 6 साल का बेटा है। ट्रेनिंग के चलते उन्हें दोनों बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में भेजना पड़ा। स्वाति ने बेटी को देहरादून और बेटे को पंचगनी के बोर्डिंग स्कूल में भर्ती कराया है।
– स्वाति ने पुणे यूनिवर्सिटी से एमए किया है। वो पहले केंद्रीय विद्यालय में टीचर थीं। पति के प्यार और सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़कर आर्मी ज्वॉइन करने का फैसला किया था।

शहीद पति का सपना पूरा करने आतंकियों से लड़ूंगी: लेफ्टिनेंट बनीं स्वाति महाडिक

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