कौन होगा योगी और मौर्य की सीट पर उम्मीदवार

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कौन होगा योगी और मौर्य की सीट पर उम्मीदवार
कौन होगा योगी और मौर्य की सीट पर उम्मीदवार

विधान परिषद की रिक्त सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन के बाद अब प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी मिशन उप चुनाव पर ध्यान देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की विधान परिषद की सदस्यता पक्की हो जाने के साथ ही उनका लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा भी तय है।

विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण के 14 दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सांसद पद से इस्तीफा देना होगा। इनका लोकसभा में उनका कार्यकाल मई 2019 तक है इसलिए दोनों सीटों पर उपचुनाव भी तय है। इनके इस्तीफा देने के बाद अब भाजपा का मिशन उपचुनाव शुरू होगा।

गोरक्षपीठ से जुड़ी गोरखपुर और नेहरू परिवार से जुड़ी होने के नाते फूलपुर सीट का ऐतिहासिक महत्व है। भाजपा इन दोनों सीट को किसी भी हाल में हाथ से फिसलने नहीं देगी। इसके परिणाम 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए लिटमस टेस्ट होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1998 से गोरखपुर सीट पर लगातार लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं। जबकि उसके पहले 1989, 1991 और 1996 में इस सीट पर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने चुनाव जीता था।

अवेद्यनाथ 1970 में अपने गुरु महंत दिग्विजय नाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद हुए उप चुनाव में भी सांसद चुने गए थे। दिग्विजय नाथ 1969 में इस सीट पर चुने गए थे। गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री से जुड़ी है इसलिए चुनौती भी कुछ ज्यादा ही है। वह भी तब जब विपक्ष भाजपा को घेरने के लिए कोई भी बड़ा कदम उठा सकता है।

अब इलाहाबाद जिले के फूलपुर सीट की बात। यहां 2014 में भाजपा पहली बार जीती। नेहरू की विरासत वाली इस सीट पर समाजवादियों ने जरूर परचम फहराया लेकिन, भगवा झंडा पहली बार केशव मौर्य की अगुआई में ही फहरा। केशव प्रसाद मौर्य ने यहां ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को उनके मुकाबले उतारा था। भाजपा को अब केशव जैसा चेहरा फूलपुर के लिए भी चाहिए। भाजपा इन दोनों सीटों के लिए अभी से समीकरण बनाने में जुट गई है।

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